दिल्‍ली/एनसीआर के साथ साथ हिमाचल प्रदेश और आस पास के इलाकों में लोगों को तपती गर्मी से राहत मिल सकती है। मौसम विभाग (Indian Meteorological Department) का अनुमान है कि आज से पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो सकता है। इससे हल्के बादल छाए रहने और धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। हिमाचल में 10, 11 और 13 मई को आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। 

उत्तर भारत के कई हिस्सों में बीते कुछ दिनों चल रही धूल भरी आंधी का असर दिल्‍ली/एनसीआर की हवा पर भी दिखाई दे रहा है। दिल्ली/एनसीआर में आसमान में धूल कणों की मात्र बढ़ गई है। इससे श्‍वांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की तकलीफें बढ़ गई हैं। अब पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हवा की सेहत में सुधार की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते 13 और 14 तारीख को तेज हवा के साथ बारिश होने के भी आसार हैं।

 

 

हिमाचल में आंधी चलने और ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका से बागवानों की चिंता बढ़ गई है। प्रदेश में बृहस्‍पतिवार तक तेज गर्मी के कारण लोगों को लू का सामना करना पड़ा है। बृहस्‍पतिवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान ऊना में 41.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। देश में सबसे अधिक गर्म हिसार रहा जहां अधिकतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शुक्रवार को 50 किलोमीटर की रफ्तार से आंधी चलने की आशंका है।

 

यह है पश्चिमी विक्षोभ 
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाकों में सर्दियों के मौसम में आने वाले ऐसे तूफान को कहते हैं जो वायुमंडल की ऊंची तहों में भूमध्य सागर, अटलांटिक महासागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लाकर उसे अचानक वर्षा और बर्फबारी के रूप में उत्तर भारत, पाकिस्तान और नेपाल में गिरा देता है। यह एक गैर-मानसूनी वर्षा है जो पछुवा पवन (वेस्टर्लीज) द्वारा संचालित होती है।

ऐसे होता है उत्‍पन्‍न 
पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर में अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के रूप में उत्पन्न होता है। यूक्रेन और उसके आस-पास के क्षेत्रों पर एक उच्च दबाव क्षेत्र समेकित होने के कारण, ध्रुवीय क्षेत्रों से उच्च नमी के साथ अपेक्षाकृत गर्म हवा के एक क्षेत्र की ओर ठंडी हवा का प्रवाह होने लगता है। इससे ऊपरी वायुमंडल में साइक्लोजेनेसिस के लिए अनुकूल परिस्थितियां उत्पन्न होने लगती है, जो कि एक पूर्वमुखी-बढ़ते एक्सट्रैटॉपिकल डिप्रेशन के गठन में मददगार होती हैं। फिर धीरे-धीरे यही चक्रवात ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मध्य-पूर्व से भारतीय उप-महाद्वीप में प्रवेश करता है।

भारतीय उप-महाद्वीप पर प्रभाव
पश्चिमी विक्षोभ खासकर सर्दियों में भारतीय उपमहाद्वीप के निचले मध्य इलाकों में भारी बारिश तथा पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कृषि में इस वर्षा का बहुत महत्व है, विशेषकर रबी फसलों के लिए। उनमें से गेहूं सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है, जो भारत की खाद्य सुरक्षा को पूरा करने में मदद करता है।