मतगणना से पहले ही कांग्रेस ने केंद्र में सरकार बनाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसी रणनीति के तहत यदि एनडीए बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा तो पार्टी तत्काल सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है ताकि राष्ट्रपति को सबसे बड़े दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का मौका ही न मिले। 

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के रणनीतिकार अहमद पटेल और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के घर पर इस रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। एक नेता ने बताया कि त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में हम सबसे पहले राष्ट्रपति के पास पहुंचेंगे। 

हम कर्नाटक मॉडल को केंद्र में भी अपना सकते हैं। इस बीच विपक्षी दलों ने भी त्रिशंकु जनादेश की स्थिति में बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति को पत्र सौंपने का फैसला किया है। पत्र पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और डीएमके प्रमुख एम स्टालिन के हस्ताक्षर हैं। इस मुहिम में कांग्रेस को शामिल नहीं किया गया है। 

खत में ये लिखा है

विपक्षी पार्टियों ने अपने खत में लिखा है कि नतीजों के एलान के बाद जब 17वीं लोकसभा के गठन की अधिसूचना जारी की जाए तो हमें भी सरकार बनाने के लिए 272 सदस्यों की सूची सौंपने का मौका दिया जाए। लिहाजा हमारे अनुरोध पर विचार किया जाए।

इस पत्र के साथ कानूनी विशेषज्ञों का मत भी लगाया है, जिन्होंने बताया कि खंडित जनादेश की स्थिति में किसे सरकार बनाने का आमंत्रण मिलना चाहिए। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद यह राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करता है कि वह सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देते हैं या साथ मिलकर चुनाव लड़ रहीं पार्टियों के गठबंधन को।

 

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