21 साल की कृष्णा सुरेश भिकड़िया की हादसे में मौत गई। वह ड्रॉइंग सिखाने आती थीं और खुद भी फैशन डिजाइनिंग सीख रही थीं। कृष्णा अभी अविवाहित थीं और उनकी कोई ख्वाहिश अधूरी न रह जाए, इसलिए अंतिम यात्रा से पहले पूरा शृंगार किया गया। सजी-धजी कृष्णा का शव देखकर हर किसी की रुलाई फूट पड़ी।

 

 

 

  • शिक्षा मंत्री बोले- मनपा है जिम्मेदार, मनपा आयुक्त ने कहा- हमें तो लेआउट पास कर सूडा ने दी बिल्डिंग
  • सूडा सीईओ ने कहा- मनपा को ट्रांसफर करने के बाद अवैध निर्माण हुआ
  • बिजली बोर्ड का भी कहना है कि हादसे में हमारे विभाग की कोई गलती नहीं

सूरत. तक्षशिला आर्केड अग्निकांड में जान गंवाने वाले मासूम बच्चों की चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई कि सरकार के हर स्तर पर लीपापोती करने की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भले ही शुक्रवार को हादसे के तुरंत बाद घटना की जांच प्रमुख सचिव को सौंपकर तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हों, लेकिन यहां रिपोर्ट का इंतजार किसको है?

सरकार के मंत्री हाें, या विभागों के आला अधिकारी, सबने अपने स्तर पर ही खुद को क्लीनचिट देने की खानापूर्ति कर ली है। मतलब 22 बच्चों की भयावह मौत का कोई दोषी है तो बस दोनों बिल्डर और क्लास संचालक। इनको पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया।

शिक्षा मंत्री ने शुक्रवार को ही अपने विभाग को क्लीनचिट देते हुए सारा दोष महानगर पालिका पर मढ़ दिया था। शनिवार को इनसे भी एक कदम आगे निकलकर मनपा आयुक्त ने कह दिया कि उनके विभाग को कोई दोष नहीं है। मनपा को यह बिल्डिंग सूडा से ट्रांसफर हुई थी। वह भी पहले से बनी हुई। बाद में एक मंजिल और बनी, उसकी अनुमति ले ली थी। जबकि, 15 मीटर से कम ऊंचाई की बिल्डिंग्स को तो फायर एनओसी की जरूरत ही नहीं।

यानी चाहे जो बनाओ, सेफ्टी हो या न हो, मनपा की कोई जिम्मेदारी नहीं। इस पर सूडा अधिकारियों से पूछा तो सीईओ ने भी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट से एसी में आग लगने को कारण माना गया, लेकिन बिजली बोर्ड के अधिकारी भी हादसे को लेकर खुद को दोषी नहीं मानते। उनका कहना है कि हमरा कोई ट्रांसफार्मर वहां नहीं था। हमारी सभी लाइनें नीचे से गई हैं। आग वहां लगे होर्डिंग की वजह से लगी थी।

ऐसे पल्ला झाड़ लिया मंत्री और अफसरों ने
 

^यह पूरी तरह हमारा मामला नहीं है फिर भी हम इसमें कड़ी कार्रवाई करेंगे। महानगर पालिका की कमी रह गई, जिसका भी दोष होगा, रिपोर्ट आने के बाद उस पर कार्रवाई की जाएगी। - भरत चुड़ासमा, शिक्षा मंत्री

^जब यह ले आउट प्लान मंजूर हुआ तो सूडा के अधिकारक्षेत्र  में था। 15 मीटर से कम ऊंची इमारतों को हम फायर सेफ्टी के आधार पर नहीं जांचते। इसी वजह से इसे भी नहीं जांचा। -एम थेन्नारसन, मनपा आयुक्त 

^हमारा कोई ट्रांसफार्मर वहां नहीं था। हमारी सभी लाइनें नीचे से गई हैं। आग वहां लगे होर्डिंग कि वजह से लगी थी। हमारा वहां ज्यादा कोई काम था, नहीं फिर भी फोरेंसिक की टीम ने सैंपल लिए हैं। - जीबी पटेल, अभियंता सूरत रूरल सर्किल

^इस इमारत का वर्ष 2001 में प्लान ले आउट प्लान पास करवाया गया था। जिसके बाद यह मनपा के हद में आ गई। इसके बाद तीनों मंजिलों को वैध करने के लिए इंपैक्ट फीस भरी गई थी। - अमित अरोड़ा, सीईओ, सूडा

प्रमुख सचिव ने मुआयना किया, तीन दिन में सीएम को सौंपेंगे रिपोर्ट

सरथाणा में आगजनी के बाद राज्य के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने शनिवार को सूरत का दौरा किया। उन्होंने आग लगने के कारणों और लापरवाही की जांच रिपोर्ट मनपा आयुक्त से मांगी। मनपा समेत डीजीवीसीएल और सूडा के सभी अधिकारियों ने अपने डाटा के साथ रिपोर्ट सेक्रेटरी को भेज दी हैं। बैठक में पुलिस आयुक्त समेत शहर के सभी अधिकारियों को भी बुलाया गया था। वहीं कार्रवाई करते हुए मनपा आयुक्त ने डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर एसके आचार्य और कीर्ती मोढ को सस्पेंड कर दिया। जानकारी के बाद प्रिसिंपल सेक्रेटरी मुकेश पुरी को इस मामले पर रिपोर्ट बनाने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा आदेश दिया गया था। शुक्रवार रात को ही पुरी ने सूरत पहुंचकर अधिकारियों के साथ बैठक की और मौके का मुआयना किया। फिर शनिवार को मनपा, सूडा (सूरत अर्बन डेवलपमेंट) पुलिस, डीजीवीसीएल के अधिकारियों के साथ बैठक करके सभी से उनकी विभाग द्वारा किए गए अब तक की कार्रवाइयों की जानकारी मांगी।

सिर्फ मुआवजे की घोषणा कर देना खतरों का समाधान नहीं हो सकता: मनवाधिकार आयाेग

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अग्निकांड को लेकर गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। घटना को युवा छात्रों के मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन मानते हुए आयोग ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर मामले में भवन स्वामी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की स्थिति और अन्य संबंधित दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्हें इमारत की अपनी कानूनी स्थिति, इसके निर्माण, अग्निशमन के उपायों, अग्नि सुरक्षा मंजूरी और पीड़ित परिवारों को दी गई राहत को भी शामिल किया गया है। आयोग यह भी अपेक्षा करता है कि घायल व्यक्तियों को राज्य द्वारा सर्वोत्तम और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाए। आयोग ने कहा है कि केवल पीड़ित परिवारों को मुआवजे की घोषणा इस तरह के खतरों का समाधान नहीं हो सकती है।

काेचिंग संचालक अरेस्ट दाे बिल्डर हुए फरार 
हादसे काे लेकर पुलिस ने शनिवार काे काेचिंग संचालक भार्गव भुटानी काे गिरफ्तार कर लिया है। दाे अन्य बिल्डर हर्षुल वेकारिया और जिग्नेश पालीवाल फरार हैं। पुलिस ने मामले में आईपीसी की अलग-अलग धाराओं में शुक्रवार रात काे ही इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था। दाे अधिकारियाें काे सस्पेंड किया गया है। वहीं राज्य सरकार ने सभी काेचिंग पर राेक लगा दी है। उधर, हादसे के बाद शहर में शनिवार को विभिन्न स्कूलों के अलावा शहर के लोगों ने भी प्रदर्शन किया। 

भविष्य की इंजीनियर, चित्रकार और आर्किटेक्ट को निगल गई तक्षशिला की आग

यशवी: पेंटिंग का था बेहद शौक : वराछा के चीकूवाड़ी में रहने वाली केवडिया यशवी के पिता एम्ब्राएडरी का कारखाना चलाते हैं। यशवी वराछा के आशादीप स्कूल की छात्रा थी। 12वीं कॉमर्स में उसे 59.71 प्रतिशत हासिल हुए। यशवी ग्रेजुएशन के बाद एचआर से एमबीए करने की इच्छा जताई थी। उसे पेंटिंग का शौक था। उसने क्लास में प्रवेश लिया था।

सुनानी: सीए बनना चाहती थी: सुनानी हस्ती वराछा के आशादीप स्कूल की छात्रा थी। 12वीं कॉमर्स के परिणाम में उसने 62.42 प्रतिशत अंक हासिल किया है। पिता मकान दलाली का काम करते हैं। सुनानी ने सीए बनने की इच्छा जताई थी। उसे आर्किटेक्चर में भी रुचि थी, इसलिए उसने 12वीं की परीक्षा देने के बाद ही नाटा में प्रवेश ले लिया था। 

मानसी:  घर की उम्मीद थी : मानसी वराछा के आशादीप स्कूल की छात्रा थी। 12वीं कॉमर्स में उसे 53.42 प्रतिशत अंक मिले, लेकिन उसने इसे देखने के पहले ही दुनिया छोड़ दी। मानसी के पिता वर्साने हीरा मजदूरी का काम करते थे। उनके घर की आर्थिक परिस्थिति ठीक नहीं है। उनका कहना है कि बेटी पढ़ लेती तो परिस्थिति सुधर जाती, लेकिन वह चली गई।

दृष्टि: हमेशा बनाती रहती थी चित्र : दृष्टि 12वीं कॉमर्स की छात्रा थी। शनिवार को आए रिजल्ट में उसे 50 प्रतिशत अंक मिले। दृष्टि के पिता विनु भाई फैब्रिकेशन का काम करते हैं। वह चाहते थे कि बेटी आर्किटेक्चर डिजाइनर बने और खुद का बिजनेस शुरू करे, इसलिए उन्होंने उसे गर्मी की छुट्टियों में इस कोर्स में शामिल होने के लिए कहा था।

रूबी: इंटीरियर डिजाइनर बनना था : रूबी बलर पीपी सवाणी स्कूल की छात्रा थी। उसने 12वीं कॉमर्स की परीक्षा दी थी, लेकिन शनिवार को परिणाम नहीं देख सकी। वह इंटीरियर डिजाइनर बनना चाहती थी, इसलिए उसने 1 साल पहले ही इस कोर्स के लिए प्रवेश ले लिया था। वह पढ़ाई में हमेशा आगे रहती थी। आग में उसकी जान चली गई।

 

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