• बहन से प्रेरणा लेकर अर्नेस्टाइन शेफर्ड ने एक्सरसाइज शुरू की
  • अर्नेस्टाइन के मुताबिक- उम्र महज नंबरों का खेल, जज्बा हमेशा जिंदा रहता है

बाल्टीमोर. 82 साल की अर्नेस्टाइन शेफर्ड का हौसला युवाओं को भी मात दे सकता है। जब वे 11 साल की थीं, तब हादसे में घुटना टूट गया। हड्डियां ठीक से जुड़ नहीं सकीं और शेफर्ड का एक पैर दूसरे से छोटा रह गया। डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी थी कि वे कभी एक्सरसाइज करने की कोशिश भी न करें, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। 71 की उम्र में उन्होंने कड़ा अभ्यास करके शरीर को सुडौल बनाया और चैम्पियन बॉडी बिल्डर बन गईं।

शेफर्ड का कहना है कि 50 साल की उम्र तक वे केवल घर के कामकाज तक ही सीमित थीं। एक दिन उनके पति ने पिकनिक प्लान की। इसमें उनकी छोटी बहन वेलवेट भी शामिल हुई। पति के कहने पर दोनों बहनों ने स्विम सूट पहन तो लिया, लेकिन दोनों एक दूसरे को देखकर ठहाके लगाने लगीं. क्योंकि दोनों का शरीर बेडौल हो चुका था। तब दोनों ने चर्च में जाकर कसम खाई कि अब एक्सरसाइज कभी नहीं छोड़ेंगी। शेफर्ड का कहना है कि एक्सरसाइज शुरू करने से पहले उन्हें लग रहा था कि उनके लिए यह संभव नहीं है।

बहन की मौत ने तोड़ दिया 

शेफर्ड बताती हैं कि 1992 में वेलवेट की मौत के बाद वे निराश हो गईं। लेकिन एक रात बहन उनके सपने में आई और वह कसम याद दिलाई जो उन्होंने चर्च में खाई थी। शेफर्ड का कहना है कि उन्होंने अपनी बहन से सपने में बात की और उसे भरोसा दिलाया कि कसम हर हाल में पूरी होगी।

हौसला हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं

71 साल की उम्र में वे ट्रेनर के पास गईं और कड़ा अभ्यास शुरू कर दिया। 7 महीने की मेहनत के बाद वे अपने पहले बॉडी बिल्डिंग कॉम्पिटीशन में उतरने के लिए तैयार थीं। शेफर्ड का कहना है- उम्र केवल नंबरों का खेल है, लेकिन जज्बा हमेशा जिंदा रहता है। प्रतियोगिता जीतकर उन्होंने इस मिथक को झुठला दिया कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर कमजोर होने लगता है। आज वे उम्रदराज महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं। शेफर्ड कहती हैं कि हौसला हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।