गुजरात के बीजेपी के पूर्व विधायकों के संगठन ने कहा है कि महंगाई को देखकर सरकार राज्य के विधायकों और मंत्रियों की तनख्वाह बढ़ाती गई है, लेकिन पूर्व विधायकों की नहीं बढ़ाई गई. इस पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा पक्षपात क्यों किया जाता है?

 

 

गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायकों ने शिकायत की है कि पार्टी में उनकी बात नहीं सुनी जाती. पूर्व विधायकों ने ये भी कहा कि 7 से ज्यादा बार खत लिख कर प्रदेश मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा गया लेकिन एक बार भी उनका जवाब नहीं आया.

पूर्व विधायकों का कहना है कि गुजरात के 400 से ज्यादा पूर्व विधायकों के संगठन ने मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को खत लिखकर मुलाकात के लिए वक्त मांगा. मुख्यमंत्री ने वक्त तो दिया नहीं लेकिन खत का जवाब भी नहीं दिया. पूर्व विधायकों की काउंसिल के चेयरमैन बाबू भाई शाह ने कहा कि अगर अन्य राज्यों में पूर्व विधायकों को पेंशन दी जाती है तो गुजरात में पूर्व विधायकों को क्यों नहीं?  

इस मामले पर बाबू भाई ने कहा कि महंगाई को देखकर सरकार राज्य के विधायक और मंत्रियों की तनख्वाह बढ़ाती गई है, लेकिन पूर्व विधायकों की नहीं बढ़ाई गई. इस पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा पक्षपात क्यों किया जाता है, ये बात समझ नहीं आ रही. उन्होंने ये भी कहा कि पूर्व विधायक भी पुराने वक्त में लोकसेवक हुआ करते थे, उन्होंने भी ईमानदारी से जनता के लिए काम किए हैं और ऐसा भी नहीं है कि वो विधायक नहीं हैं तब जनता के काम नहीं करते.

इसके साथ ही कई मांगों को लेकर पूर्व विधायकों की काउंसिल ने कई बार सरकार को खत लिखा है. भाजपा के पूर्व विधायक जय नारायण व्यास ने इस बात पर सरकार को लताड़ा है. जय नारायण व्यास ने कहा कि जरूरतमंद 150 पूर्व  विधायकों को पेंशन का फायदा मिलना चाहिए. उच्च स्तरीय कमिटी बनाकर ये फैसला होना चाहिए कि किसे कितनी पेंशन देनी चाहिए. इसके अलावा स्टेट ट्रांसपोर्ट और सरकारी अस्पताल में मुफ्त सुविधा मिलनी चाहिए.

पूर्व विधायकों को दी जाने वाली सुविधाओं को लेकर और उनके साथ बुरे बर्ताव पर जल्द से जल्द पुन: विचार करने के लिए संसदीय मामलों के मंत्री से अपील की गई है. साथ ही विपक्ष के नेताओं से इन मांग को पूरी करने में साथ देने की विनती की गई है.