बीते महीने ये बात सामने आई थी कि फ्रांस की राजधानी पेरिस में राफेल जेट विमान का काम देखने वाले भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के दफ्तर में कुछ अज्ञात लोग अवैध तरीके से घुस गए थे. आशंका जताई गई थी कि वे लोग राफेल से जुड़े डाटा चुराने के लिए दफ्तर में घुसे थे. हालांकि, साइबर फॉरेंसिक जांच में पाया कि राफेल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की टीम के कार्यालय या अधिकारी के कंप्यूटर से किसी तरह का कोई डाटा नहीं निकाला गया है.

 

बीते महीने ये बात सामने आई थी कि फ्रांस की राजधानी पेरिस में राफेल जेट विमान का काम देखने वाले भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के दफ्तर में कुछ अज्ञात लोग अवैध तरीके से घुस गए थे. ऐसा माना जा रहा था कि वे लोग राफेल से जुड़े डाटा चुराने के लिए दफ्तर में घुसे थे और रिपोर्ट में जासूसी का मामला सामने आया था. 

उसके बाद भारत ने एक साइबर फॉरेंसिक टीम को मामले की जांच करने के लिए पेरिस भेजा था. तीन सदस्यों वाली वायु सेना की साइबर फॉरेंसिक की टीम ने जांच में पाया कि राफेल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की टीम के कार्यालय या अधिकारी के कंप्यूटर से से किसी तरह का कोई डाटा नहीं निकाला गया है.

फॉरेंसिक जांच में पता चला कि भारतीय राफेल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम के कंप्यूटर से कोई डाटा चोरी नहीं किया गया था. जांच में राफेल डील से संबंधित पेपर या कॉपी चोरी होने का कोई भी मामला सामने नहीं आया है. बता दें कि घटना के तुरंत बाद आईएएफ ने इस बारे में रक्षा मंत्रालय को सूचित कर दिया था. जांच के बाद कोई भी हार्ड डिस्‍क या दस्‍तावेज चोरी नहीं होने की बात कही गई है.

गौरतलब है कि भारत ने 58,000 करोड़ रुपये की लागत से 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांस के साथ एक करार किया था. यह करार दोनों देशों की सरकारों के बीच हुआ था. भारत को पहला राफेल विमान इस साल सितंबर में मिलने की संभावना है.