आतंकवाद निरोधक दस्ते ने नक्सली गतिविधियों में संलिप्त जिन संदिग्धों से पूछताछ की थी उनके पास से बरामद पत्रों ने भी कई राज खोले हैं।

 

आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने नक्सली गतिविधियों में संलिप्त जिन संदिग्धों से सोमवार को पूछताछ की थी, उनके पास से बरामद पत्रों ने भी कई राज खोले हैं। इन पत्रों में यूपी से नक्सलियों की जड़ें उखड़ने की छटपटाहट के साथ ही फिर से गतिविधियां तेज करने की साजिश भी सामने आई है। यूपी पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में भले ही नक्सलियों की कमर तोड़ी है, लेकिन सूबे में उनके मूवमेंट पूरी तरह खत्म नहीं किए जा सके हैं। एटीएस संदिग्धों से मिले दस्तावेजों को पहले कोर्ट के हवाले करने की तैयारी कर रही है ताकि उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जा सके।

एटीएस ने सोमवार को चार स्थानों पर छापे मारे थे और नक्सली गतिविधियों में संलिप्त आठ संदिग्धों से पूछताछ की थी। एटीएस ने भोपाल में नाम बदलकर रह रहे जौनपुर निवासी दंपती को गिरफ्तार भी किया था। आरोपित मनीष श्रीवास्तव व उसकी पत्नी वर्षा उर्फ अनीता के नाम से कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे। एटीएस ने इसी आधार पर उन्हें पकड़ा था। देवरिया व कानपुर में छह संदिग्धों से पूछताछ के साथ ही उनके कब्जे से कई पत्र व नक्सली साहित्य बरामद हुआ था।

 

बताया गया कि देवरिया में जिन संदिग्धों से पूछताछ की गई, उनमें पूर्व में पकड़ा जा चुका एक आरोपित भी शामिल था। इस शख्स के पास से हाथ के लिखे कुछ पत्र मिले हैं, जिनमें यूपी में नक्सली संगठन को फिर से खड़ा करने के लिए अंडरग्राउंड मूवमेंट चलाने की बातें भी लिखी हैं। पत्रों में 2010 में नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में पकड़े जा चुके बच्चा प्रसाद की ओर इशारा कर उसे संगठन से दूर करने की बात भी है। बरामद दस्तावेजों में सेंट्रल कमेटी से यूपी में मूवमेंट के तहत नए लोगों को जोड़े जाने का जिक्र भी है।

एटीएस संदिग्ध आरोपितों के ईमेल व सोशल मीडिया पर रहीं गतिविधियों को भी खंगाल रही है, ताकि उनके खिलाफ और साक्ष्य जुटाए जा सकें। गिरफ्तार दंपती के लैपटॉप की भी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।

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