• जनवरी 2018 में ट्रम्प प्रशासन ने पाकिस्तान को किसी भी तरह का रक्षा सहयोग देने पर पाबंदी लगाई थी
  • 22 जुलाई को ट्रम्प और इमरान की मुलाकात हुई, इसके बाद एफ-16 प्रोग्राम के लिए मदद देने का फैसला हुआ

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की मुलाकात के 5 दिन बाद शुक्रवार को पेंटागन ने 125 मिलियन डॉलर (860 करोड़ रुपए) के समझौते को मंजूरी दे दी। इसके तहत अमेरिका पाक के लड़ाकू विमान एफ-16 प्रोग्राम की 24 घंटे मॉनिटरिंग के लिए सपोर्टिंग स्टाफ मुहैया करवाएगा। 

दरअसल, ट्रम्प प्रशासन ने पाकिस्तान को रक्षा सहयोग देने के मामले पर जनवरी 2018 में रोक लगा दी थी। यह फैसला अभी भी बरकरार रखा गया है। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद केवल इतना बदलाव आया है कि अमेरिका का तकनीकी स्टाफ पाकिस्तान के एफ-16 प्रोग्राम पर नजर बनाए रखने के लिए 60 प्रतिनिधि देगा, जो कॉन्ट्रेक्ट बेस्ड होंगे।

नोटिफिकेशन जारी किया गया- पेंटागन

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया- प्रस्तावित निर्णय पूरी तरह से विदेश नीति और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को अमेरिकी तकनीकी के जरिए आधार प्रदान करता है। पाकिस्तान को संभावनाओं के अनुरूप ही तकनीकी सुरक्षा टीम मुहैया करवाई जाएगी। 

बयान के मुताबिक- पाकिस्तान ने तकनीकी सपोर्ट सर्विस को नियमित बनाए रखने के लिए अमेरिकी सरकार से आग्रह किया था। इसके अंतर्गत पाकिस्तान के एफ-16 प्रोग्राम को अमेरिकी सरकार, कान्ट्रैक्ट पर टेक्निकल और लॉजिस्टिक सपोर्ट सर्विस मिलेगी।

भारत को भी सैन्य सहायता देगा अमेरिका

भारत के सी-17 सैन्य यातायात विमान को सहयोगी दल मुहैया करवाने के निर्णय पर अमेरिकी प्रशासन ने अनुमति दे दी है। यह डील 670 मिलियन डॉलर (करीब 4600 करोड़ रुपए) से ज्यादा की है। इसका मकसद भारतीय रक्षा सुविधाओं को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूती प्रदान करना है। दरअसल, भारत ने सी-17 संसाधन खरीदने की मांग अमेरिका के सामने रखी थी। इसमें स्पेयर और रिपेयर पार्ट्स समेत प्रशिक्षण भी शामिल है।