• स्पीकर रमेश कुमार ने 25 जुलाई को 3 विधायकों को अयोग्य ठहराया था, अब इनकी संख्या 17 हुई
  • अयोग्य विधायकों में कांग्रेस के 14 और जेडीएस के 3 शामिल, कहा- फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे
  • कर्नाटक में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद येदियुरप्पा सोमवार को बहुमत साबित करेंगे
  • स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है भाजपा, जेडीएस ने कहा- येदियुरप्पा को समर्थन नहीं देंगे

 

बेंगलुरु. कर्नाटक में विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार ने रविवार को कांग्रेस-जेडीएस के 14 और बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया। बीते चार दिनों में स्पीकर कुल 17 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता पर फैसला ले चुके हैं। उन्होंने गुरुवार को तीन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की थी। कर्नाटक में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद येदियुरप्पा को सोमवार को बहुमत साबित करना है। स्पीकर ने कहा कि मौजूदा हालात में उन पर बेहद दबाव है। मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी देखरेख में विश्वास मत प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कहा है।

मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि वह बहुमत साबित करने को लेकर 100 फीसदी आश्वस्त हैं। इसके बाद सोमवार को ही पिछली कांग्रेस-जेडीएस सरकार द्वारा तैयार किए वित्त विधेयक को किसी बदलाव के बगैर पेश करेंगे। विधेयक जल्दी पेश नहीं किया गया तो हम तनख्वाह देने के लिए फंड नहीं निकाल पाएंगे। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा कि स्पीकर का फैसला लोकतंत्र की जीत है। इससे भविष्य की राजनीति को सीख मिलेगी। 

येदियुरप्पा को बहुमत के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए
17 विधायकों की अयोग्यता पर फैसले के बाद अब 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में सदस्यों की संख्या 208 रह गई है। बहुमत परीक्षण के दौरान स्पीकर को हटाकर यह संख्या 207 होगी। ऐसे में येदियुरप्पा को बहुमत हासिल करने के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए। स्पीकर के फैसले से फ्लोर टेस्ट में येदियुरप्पा सरकार की राह और आसान हो गई। भाजपा के पास एक निर्दलीय को मिलाकर 106 विधायकों को समर्थन है। जबकि कांग्रेस के पास 66, जेडीएस के 34 और एक बसपा विधायक है। विश्वास मत के दौरान कुमारस्वामी के पक्ष में वोटिंग नहीं करने पर बसपा ने अपने विधायक को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

ये 17 विधायक अयोग्य ठहराए गए
कांग्रेस (14): प्रताप गौड़ा पाटिल, बीसी पाटिल, शिवाराम हेब्बर, एसटी सोमाशेखरा, बी बस्वराज, आनंद सिंह, रोशन बेग, मुनिरत्ना, के सुधाकर, एमटीबी नागराज, श्रीमंत पाटिल, रमेश जारकिहोली, महेश कुमाथल्ली और आर शंकर।   
जेडीएस (3): एच विश्वनाथ, नारायण गौड़ा और के गोपालैया।

स्पीकर ने कहा- मौजूदा वक्त में मुझ पर बेहद दबाव

रमेश कुमार ने कहा, ‘‘येदियुरप्पा ने मुझसे कहा है कि सोमवार को अपनी देखरेख में विश्वास मत कराएं। फाइनेंस बिल भी 31 जुलाई को पेश होना है, इसलिए मैं सभी विधायकों से विश्वास मत प्रस्ताव के दौरान मौजूद रहने की अपील करता हूं। हम कहां पहुंच चुके हैं? स्पीकर के नाते मौजूदा हालात में मुझ पर काफी दबाव है। इन सब चीजों ने मुझे तनाव के समंदर में धकेल दिया है।’’

इस्तीफा दे चुके विधायकों को अयोग्य ठहराना गलत: भाजपा
विधायकों को अयोग्य ठहराने पर केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि स्पीकर अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वह विधायकों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। विधायक बच्चे नहीं हैं। वे फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। इस्तीफा दे चुके विधायकों को अयोग्य ठहराने का कोई मतलब नहीं। संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार यह मान्य नहीं है।

अयोग्य घोषित विधायक सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे
एच विश्वनाथ ने कहा, ‘‘स्पीकर का फैसला नियमों के खिलाफ है। सिर्फ एक व्हिप के आधार पर विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। आप किसी विधायक को सदन में मौजूद रहने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं। सोमवार को सभी विधायक सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाएंगे।’’ स्पीकर ने कहा है कि दल बदल कानून के तहत 23 मई 2023 तक सभी अयोग्य विधायकों की सदस्यता खत्म रहेगी। साथ ही उनके उपचुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई है।

जेडीएस विपक्ष की भूमिका में ही रहेगी

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि रमेश कुमार को पद छोड़ने के लिए कह दिया गया है, जो पारंपरिक रूप से सत्तारूढ़ दल के किसी सदस्य के पास होता है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। दूसरी ओर जेडीएस ने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को समर्थन देने से इनकार कर दिया। जेडीएस ने कहा है कि वह विधानसभा में विपक्ष की भूमिका में ही रहेगी।

ऐसे बढ़ गई थी कुमारस्वामी की मुश्किल
चार दिन चली चर्चा के बाद 23 जुलाई की शाम को कुमारस्वामी सरकार फ्लोर टेस्ट में फेल हो गई थी। विश्वास मत के दौरान स्पीकर को हटाकर सदन में विधायकों की संख्या 204 थी। बहुमत के लिए 103 का आंकड़ा जरूरी था। कांग्रेस-जेडीएस के पक्ष में 99 वोट पड़े, जबकि विरोध में 105 वोट पड़े। कुमारस्वामी 14 महीने से 116 विधायकों के साथ सरकार चला रहे थे, लेकिन इसी महीने 15 विधायक बागी हो गए। यहीं से सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ गई थीं।