• 42 दिनों के अज्ञातवास के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी मंगलवार को ही पटना लौटे हैं
  • दिन में सदस्यता अभियान को लेकर राबड़ी, जगदानंद व आलोक मेहता के साथ किया मंथन
  • परिवार बचाएं या पार्टी, अलार्मिंग स्थिति होने पर साथ बैठने को तैयार हुआ लालू परिवार

 

पटना. लालू के बड़े लाल तेजप्रताप यादव ने भी तेजस्वी के साथ आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। तेजप्रताप ने बुधवार को ट्वीट किया- अब सारे विरोधियों को होशियार हो जाना चाहिए, क्योंकि महाभारत यानी 2020 विधानसभा चुनाव नजदीक आ गया है और कृष्ण यानी तेजप्रताप का अर्जुन (तेजस्वी) आ गए हैं। 42 दिनों के अज्ञातवास के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी मंगलवार को ही पटना लौटे हैं।

एक-दाे दिनाें में मिलेगी जिलाें की रिपाेर्ट
तेजस्वी ने पटना पहुंचने के बाद मां राबड़ी देवी और राजनीतिक सहयोगियों, वरीय नेता जगदानंद एवं आलोक मेहता के साथ राजद के सदस्यता अभियान पर चर्चा की। तेजस्वी को बताया गया कि पहले चरण में 50 लाख सदस्यता अभियान फाॅर्म लोगों तक पहुंच गया है। राजद के सदस्यता अभियान में तेजी आयी है। एक-दो दिनों में प्रखंड और जिला अध्यक्ष अपने-अपने जिलों की रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपेंगे।

9 अगस्त को राजद ने जब इस सामूहिक सदस्यता अभियान की शुरुआत की थी, तब तेजस्वी इसमें शरीक नहीं हो पाए थे। यह लालू प्रसाद के साथ ही पार्टी के वरीय नेताओं को भी अखरा था। इसके बाद से ही उन्हें नेता प्रतिपक्ष के पद से मुक्त करने की बातें शुरू हो गई थीं। दिन की बैठक के बाद तेजस्वी देर शाम पटना जंक्शन स्थित दूध मार्केट के तोड़े जाने के विरोध में दूध विक्रेताओं के पास पहुंचे और उनके समर्थन में धरना पर बैठ गए। लालू प्रसाद ने पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद वर्ष 1991 में इस मार्केट की स्थापना करायी थी। 

लालू का परिवार साथ बैठने को तैयार

राजद के संस्थापक सदस्यों में ये मुद्दा तैरने लगा तो मामला बढ़ने पर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने अपने राजनीतिक वारिसों को स्पष्ट संदेश पहुंचाया कि कार्यकर्ता मायूस हैं और राजद संगठन पर अब वे ही सवाल उठाने लगे हैं। सदस्यता अभियान में अति पिछड़ा समाज के नेता अब कहने लगे हैं कि नेताओं के नाम के आगे से ‘यादव’ सरनेम को कम करना पड़ेगा।


निचले तबके के नेताओं ने यह कहना शुरू कर दिया है कि कुर्सी पर बैठाने वाला हमारा नेता (लालू प्रसाद) जेल में है और सत्ता की कुर्सी पर बैठने की लालसा में परिवार आपस में जूझ रहा है। पिछले एक महीने में ये बात प्रखंड से लेकर रांची अस्पताल में इलाज करा रहे लालू प्रसाद और दिल्ली में जमे तेजस्वी तक पहुंची, तब पारिवारिक सत्ता संघर्ष से जूझ रहा परिवार अपनी लडाई को विराम देने की ओर बढ़ा।

ऐसी अलार्मिंग परिस्थिति होने पर ही अब लालू कुनबा साथ बैठने को तैयार हुआ है। तेजस्वी यादव का डेढ़ महीने पर पटना वापस लौटना और फिर से पार्टी की गतिविधियों में शामिल होना इसी की कड़ी है। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने अपने परिवारजनों को स्पष्ट संदेश पहुंचवाया है कि जब परिवार और पार्टी में से किसी एक को बचाने की नौबत आएगी तो पार्टी ही प्राथमिकता में होगी।