सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा का कहना है कि फिलहाल चालान टू कोर्ट किया जा रहा है. ऑन स्पॉट चालान नहीं किया जा रहा है. लिहाजा आपको संबंधित इलाके के कोर्ट में जाकर चालान भरना होता है. एडवोकेट मार्कंडेय पंत ने बताया कि कोर्ट में जुर्म कबूल करने से इनकार करने पर समरी ट्रायल शुरू होता है. इस दौरान पुलिस को विटनेस पेश करना होता है. अगर पुलिस विटनेस पेश नहीं कर पाती है, तो मामला खारिज हो जाता है

 

  • कोर्ट में जाकर भरना होता है ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर चालान

  • कोर्ट में जुर्म कबूल करने से इनकार कर सकता है वाहन मालिक

  • कोर्ट में शुरू होता है समरी ट्रायल, पुलिस को पेश करना होता है विटनेस

  • नया मोटर व्हीकल एक्ट एक सितंबर से लागू हो गया है. इसके तहत ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की दर में इजाफा किया गया है. नए मोटर व्हीकल एक्ट के लागू होने के बाद से ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह अलर्ट है और लगातार भारी भरकम चालान काट रही है.

    कई लोगों की शिकायत है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं करने पर भी पुलिस चालान काट रही है. अगर कोई एक नियम का उल्लंघन करता है, तो उसके ऊपर कई नियमों के उल्लंघन का मामला बनाकर भारी भरकम चालान काटा जा रहा है.

    अगर आपने भी ट्रैफिक नियमों का पूरा पालन किया है और आपके वाहन का चालान काट दिया गया है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा का कहना है कि फिलहाल चालान टू कोर्ट किया जा रहा है. ऑन स्पॉट चालान नहीं किया जा रहा है.

    इसका मतलब यह हुआ कि अगर ट्रैफिक पुलिस आपके वाहन का चालान काटती है, तो आपको उस इलाके के कोर्ट में जाकर चालान भरना होता है, जहां पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का चालान काटा गया है. ट्रैफिक पुलिस ऑनस्पॉट चालान भरने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है.

     

    एडवोकेट मार्कंडेय पंत ने बताया कि जब आप चालान भरने कोर्ट जाते हैं, तो आपके पास दो विकल्प होते हैं. पहला विकल्प यह होता है कि आप कोर्ट में जाएं और जुर्म कबूल करते हुए जुर्माना भर दें. इसके अलावा दूसरा विकल्प यह होता है कि आप जुर्म कबूल करने से इनकार कर सकते हैं.

  • इसके बाद कोर्ट का मामले में समरी ट्रायल (Summary trial) होता है. अगर आपका चालान गलत तरीके से काटा गया है, तो कोर्ट से आपको राहत मिल जाती है. हालांकि अगर आप दोषी पाए जाते हैं, तो आपको जुर्माना अदा करना पड़ता है.

    सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा और एडवोकेट मार्कंडेय पंत का कहना है कि चालान में एक विटनेस के साइन होना जरूरी है. अगर कोर्ट में मामले का समरी ट्रायल चलता है, तो ट्रैफिक पुलिस को विटनेस पेश करना होता है. अगर पुलिस विटनेस पेश नहीं कर पाती है, तो मामला खारिज हो जाता है.

    एडवोकेट मार्कंडेय पंत का कहना है कि पुलिस ज्यादातर मामलों में विटनेस पेश नहीं कर पाती है, जिसके चलते मामला खारिज हो जाता है. हालांकि इसके लिए समरी ट्रायल से गुजरना पड़ता है. समरी ट्रायल का मतलब यह है कि इन मामलों को जल्द से जल्द निपटाया जाता है.

    ऑनलाइन भी भर सकते हैं चालान

    अगर ट्रैफिक पुलिस आपके वाहन का चालान करती है, तो आपको ऑनस्पॉट चालान भरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. आपके पास इलाके की कोर्ट में जाकर चालान का भुगतान करने या फिर https://echallan.parivahan.gov.in/index/accused-challan पर ऑनलाइन चालान भरने का विकल्प होता है.

    दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर वर्चुअल कोर्ट पोर्टल यानी vcourts.gov.in का उद्‌घाटन किया गया. लिहाजा यहां ट्रैफिक चालान का ऑनलाइन भुगतान आसानी से किया जा सकता है. यह देश का ऐसा पहला लीगल पोर्टल है.

    इसके अलावा अगर ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस, आरसी या पॉल्यूशन चेक का सर्टिफिकेट नहीं है, तो पुलिस आपके वाहन को भी जब्त कर सकती है. इसके बाद कोर्ट से वाहन तभी छूटेगा, जबकि वाहन का मालिक सभी दस्तावेज पेश करेगा.

    ट्रैफिक पुलिस ने काटे ताबड़तोड़ भारी भरकम चालान

    नए मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के पहले दिन से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर ताबड़तोड़ चालान काटे जा रहे हैं. अगर दिल्ली की बात करें, तो यहां पहले दिन 3900 से ज्यादा चालान काटे गए. कई बार चालान वाहन की कीमत से ज्यादा तक के काट दिए जा रहे हैं.

    एक स्कूटी का चालान 23 हजार रुपये का काटा गया, जबकि स्कूटी की कीमत 15 हजार रुपये बताई जा रही है. इसके अलावा एक ऑटो वाले पर 32 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि एक ट्रैक्टर का 59 हजार रुपये का चालान काटा गया.

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