प्रदेश के बिजलीघरों का उत्पादन घटने से बिजली की जबरदस्त किल्लत हो गई है। बिजली की कमी से आपूर्ति का शिड्यूल गड़बड़ा गया है। शहरों से लेकर गांवों तक आपात कटौती की जा रही है। पावर ग्रिड कार्पोरेशन की 765 केवी आगरा-झटीकारा ट्रांसमिशन लाइन के तकनीकी कारणों से बंद होने की वजह से एनर्जी एक्सचेंज से खरीदी गई बिजली भी पश्चिमी क्षेत्र से उत्तरी क्षेत्र पहुंचने में रुकावट आ रही है। 

एकाएक पैदा हुए बिजली संकट को लेकर पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने सभी बिजली कंपनियों के  प्रबंध निदेशकों को पत्र भेजकर बिजली आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय स्तर पर सांसदों व विधायकों को भी इससे अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।

प्रदेश में इस समय बिजली की मांग 21 हजार मेगावाट से ऊपर चल रही है जबकि उपलब्धता 19,500 मेगावाट के आसपास है। बिजली की कमी के चलते 1 सितंबर से ग्रामीण क्षेत्रों, तहसील व जिला मुख्यालयों को तय शिड्यूल से कम बिजली आपूर्ति हो रही है। 

 

मांग के मुताबिक उपलब्धता न होने से जिला मुख्यालयों से लेकर गांवों तक औसतन एक से दो घंटे की आपात कटौती जा रही है। पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष आलोक कुमार के  मुताबिक बीते 10 दिन से प्रदेश की कई बिजली उत्पादन इकाइयों के बंद होने के कारण आकस्मिक कटौती की स्थिति बनी है। 

बिजली की ज्यादा कमी होने पर अधिक लाइन हानियों वाले क्षेत्रों में पहले कटौती की जा रही है। आलोक कुमार के अनुसार उत्पादन इकाइयों के बंद होने व पश्चिमी क्षेत्र से खरीदी गई बिजली के प्रदेश में न आ पाने की वजह से पीक आवर्स में 1000-1200 मेगावाट तक आपात कटौती करनी पड़ रही है।

उत्पादन में 5500 मेगावाट से ज्यादा की कमी
बीते 10 दिन में प्रदेश में बिजली इकाइयों के बंद होने से उत्पादन में 5500 मेगावाट से ज्यादा की कमी हुई है। कई इकाइयां तकनीकी गड़बड़ी के कारण बंद हैं तो कुछ कोयले की कमी के कारण नहीं चल पा रही हैं। बारा (प्रयागराज) की 660 मेगावाट क्षमता की इकाई तकनीकी गड़बड़ी व कोयले की कमी के कारण बंद है। 

इसके अलावा ललितपुर की 3300 मेगावाट क्षमता की इकाइयां भी कोयले की कमी के कारण बंद हैं। मेजा की 660, अनपरा की 500 व 210 मेगावाट क्षमता की एक-एक इकाइयां तकनीकी गड़बड़ी के कारण बंद चल रही हैं। इसके अलावा कोयले की कमी के कारण कुछ और इकाइयां भी बंद चल रही हैं।

सांसदों-विधायकों को आपूर्ति शिड्यूल की जानकारी दें

आलोक कुमार का कहना है कि बिजली उत्पादन बढ़ाकर रोस्टर के अनुसार आपूर्ति के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बिजली कंपनियों के  एमडी से कहा है कि वर्तमान में लागू आपूर्ति शिड्यूल और बिजली की किल्लत के बारे में स्थानीय स्तर पर सभी सांसदों व विधायकों को अवगत कराया जाए।

साथ ही सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं से कहा गया है कि अगर कोई आकस्मिक या लंबी अवधि का ब्रेकडाउन होता है तो उसके बारे में और आपूर्ति सामान्य होने के संभावित समय के बारे में भी सांसदों व विधायकों को जानकारी दी जाए।
 




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