सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जिलानी ने कहा- जन्मस्थान मस्जिद के भीतर है, इस पर पहले विवाद नहीं था

इससे पहले मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा था- अयोध्या में मंदिर था, यह महज विश्वास के आधार पर स्पष्ट नहीं होता

 

 

अयोध्या. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या जमीन विवाद मामले को लेकर बुधवार को 31वें दिन भी सुनवाई हुई। सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वकील जफरयाब जिलानी ने अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को यह कतई स्वीकार नहीं कि राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है। यह केवल हिंदुओं का विश्वास है। इस मामले में जिला जज के ऑब्जरवेशन के बाद हमने इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है।

जिलानी के मुताबिक, जिला जज ने कहा था कि ये राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है। हमने कभी अपनी ओर से नहीं कहा कि ये जन्मस्थान है। 1950 से 1989 के दौर से पहले जन्मस्थान को लेकर यह विवाद नहीं था कि वह मस्जिद के भीतर है। इसके बाद मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि हिंदू पक्ष ने जन्मस्थान को लेकर पुरातात्विक सबूतों (एएसआई) को नकार दिया था। हिंदू पक्ष ने कहा था कि पुरातत्व विज्ञान, भौतिकी और रसायन विज्ञान की तरह नहीं है। यह एक सामाजिक विज्ञान है और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

30वें दिन मुस्लिम पक्ष ने कहा था- रेलिंग के पास पूजा से उसे मंदिर नहीं मानना चाहिए

इससे पहले मंगलवार को 30वें दिन की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा था कि महज विश्वास के आधार पर यह स्पष्ट नहीं होता कि अयोध्या में मंदिर था। भारत में यह फैलाना आसान है कि किसी देवता का अमुक स्थान है। मैं मानता हूं कि भारत में पूजा की कई मान्यताएं हैं। लेकिन, अयोध्या में रेलिंग के पास जाकर पूजा किए जाने से उसे मंदिर नहीं मानना चाहिए।

बाबरी मस्जिद में 1949 तक नमाज हुई : मुस्लिम पक्ष
धवन ने दलील दी थी कि 1528 में मस्जिद बनाई गई थी और 22 दिसंबर 1949 तक वहां लगातार नमाज हुई। वहां तब तक अंदर कोई मूर्ति नहीं थी। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जजों के फैसलों के हवाले से मुस्लिम पक्ष के कब्जे की बात कही। उन्होंने कहा था कि बाहरी अहाते पर ही उनका अधिकार था। दोनों पक्षकारों के पास 1885 से पुराने राजस्व रिकॉर्ड भी नहीं हैं।

18 अक्टूबर तक दलीलें रखी जाएंगी
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई चल रही है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में संविधान पीठ के सामने अब तक हिंदू और मुस्लिम पक्ष के साथ निर्मोही अखाड़े की तरफ से दलीलें पेश की जा चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला नवंबर मध्य में आने की उम्मीद है। 18 सितंबर को चीफ जस्टिस ने कहा था कि हम 18 अक्टूबर तक सुनवाई खत्म करना चाहते हैं ताकि जजों को फैसला लिखने में चार हफ्ते का वक्त मिले। इसके लिए सभी को मिलकर सहयोग करना चाहिए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा रामलला विराजमान को मिले। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं।




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