• बताया जा रहा है कि प्लास्टिक पर बैन लगाए जाने से अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और बेरोजगारी बढ़ेगी
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले कहा था- 2022 तक भारत को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त किया जाएगा

 

 पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र सरकार देश में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक नहीं लगाएगी। इसका कारण बताया जा रहा है कि प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाए जाने से उद्योगों को काफी नुकसान होगा। साथ ही इसका अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा और बेरोजगारी बढ़ेगी।

जल शक्ति मिशन द्वारा संचालित स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण ने मंगलवार को ट्वीट किया- प्रधानमंत्री द्वारा 11 सितंबर 2019 को शुरू किया गया स्वच्छता ही सेवा अभियान सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाने के बारे में नहीं है, बल्कि इसके इस्तेमाल को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता लाकर इसे जन आंदोलन बनाना है।

 

इससे पहले प्रधानमंत्री ने कहा था कि 2022 तक भारत को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त किया जाएगा। उन्होंने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर बुधवार से छह वस्तुओं के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही थी। इनमें प्लास्टिक के कैरीबैग, थर्माकोल के कटलरी आइटम्स, पाउच, प्लास्टिक की 200 मिली से छोटी बोतलें और स्ट्रॉ जैसी चीजें शामिल थीं। 

प्लास्टिक की बोतलों, प्लेट्स जैसी चीजों पर अभी बैन नहीं

पिछले महीने पर्यावरण मंत्रालय ने भी एडवाइजरी जारी कर कहा था कि सरकारी ऑफिस, पब्लिक और प्राइवेट कंपनियों में कृत्रिम फूल, फ्लैग, बैनर्स, प्लास्टिक की पानी की बोतलें आदि इस्तेमाल न की जाएं। वहीं, दो अधिकारियों ने कहा कि प्लास्टिक बैग्स, कप्स, प्लेट्स, छोटे बोतलों, स्ट्रॉ और और कुछ प्रकार के पाउचों के इस्तेमाल पर अभी रोक नहीं लगाई जाएगी। सरकार इसके इस्तेमाल में कमी करने का प्रयास करेगी।

‘राज्यों से मौजूदा नियमों को लागू करने के लिए कहा जाएगा’

पर्यावरण मंत्रालय में शीर्ष अधिकारी चंद्र किशोर मिश्रा ने न्यूज एजेंसी को बताया कि सरकार अभी राज्यों को पॉलीथीन बैग जैसे कुछ सिंगल यूज प्लास्टिक के भंडारण, निर्माण और उपयोग के खिलाफ मौजूदा नियमों को लागू करने के लिए कहेगी। हालांकि, प्रतिबंध के लिए कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है।




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