मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से रविवार को उनके सीएम आवास पर मुलाकात के बाद कमलेश तिवारी के परिवार ने नाखुशी जाहिर की। कमलेश तिवारी की मां कुसुस तिवारी, पत्नी किरण तिवारी और दोनों बेटों के साथ ही हिन्दू समाज पार्टी के एक प्रतिनिधि को उनके पैतृक गांव सीतापुर से मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए दोपहर बाद लाया गया।

कुसुम तिवारी ने सीतापुर में मीडिया से कहा- “मैं वहां पर उनसे (सीएम) यह पूछने गई थी कि क्यों मेरे बेटे की हत्या की गई? क्यों उनकी सुरक्षा घटाई गई? उन्होंने यह जवाब दिया कि वे जिस वक्त ये घटना हुई, यहां पर नहीं थे।”

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद लखनऊ में परिवार को मीडिया से भी मुलाकात नहीं करने दी गई। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वे मुख्यमंत्री की तरफ से दिए गए आश्वासन से संतुष्ट हैं, इसके जवाब में कमलेश तिवारी की मां ने कहा- “हमारी इच्छा के मुताबिक ना उनका हाव रहे न भाव रहे। हम मुख्यमंत्री की तरफ से दिए गए आश्वासन से संतुष्ट नहीं है और अगर इंसाफ नहीं हुआ तो हथियार उठा लेंगे।”

कमलेश तिवारी की दो शख्स ने उनके लखनऊ के खुर्शीदबाग स्थित घर में बने ऑफिस में 18 अक्टूबर को हत्या कर दी। पुलिस ने इस केस में तीन साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है जबकि हमलावरों दोनों शख्स की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।

कमलेश तिवारी की मां ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सीएम से मुलाकात के लिए जबरदस्ती घर छोड़कर जाने को कहा। उन्होंने कहा- “हमारे रीति-रिवाज के मुताबिक, अगर किसी का दाह-संस्कार हुआ हो तो परिवार के सदस्यों को तेरह दिनों तक घर छोड़कर जाने की इजाजत नहीं होती है। लेकिन, उन्होंने घर छोड़कर जाने की जबरदस्ती की। पुलिसवालों ने इसलिए जबरदस्ती की क्योंकि उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने हमें बुलाया है।”

 

मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में पत्नी किरन ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हमें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। हत्यारों को फांसी की सजा दिलाने की मांग पर उन्होंने भरोसा दिया कि दोषियों को सजा जरूर मिलेगी।
 

बातचीत में परिवार ने रखीं कई मांगें 
मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान पीड़ित परिवार ने कई मांगें रखीं। परिवार ने स्व. कमलेश तिवारी के बेटे को सरकारी नौकरी देने, खतरे को देखते हुए परिवार को पुलिस सुरक्षा देने, सुरक्षा के लिए परिवारी के सदस्यों को असलहों के लाइसेंस देने और उनके मुहल्ले का नामकरण स्व. कमलेश तिवारी के नाम पर करने समेत कई मांगें शामिल हैं। इससे पहले महमूदाबाद (सीतापुर) में शनिवार को करीब 10 घंटे की जद्दोजहद के कमलेश तिवारी का अंतिम संस्कार हो पाया था। आक्रोशित परिवार को मनाने के लिए मंडलायुक्त मुकेश कुमार मेश्राम व जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी ने नौ बिन्दुओं के समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया था। 
 

सीतापुर पहुंचकर मां ने जताया रोष 
मुख्यमंत्री से मिलकर वापस सीतापुर पहुंचने के बाद स्व. कमलेश तिवारी की मां कुसुम तिवारी ने कहा कि वह बातचीत से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि परिवार में मृत्यु होने पर हिन्दू धर्म में 13 दिनों तक कहीं जाया नहीं जाता है। पुलिस वाले उन पर बार-बार मुख्यमंत्री से मिलने के लिए दबाव डाल रहे थे। ऐसे में उन्हें मजबूरन लखनऊ जाना पड़ा। कुसुम तिवारी ने कहा कि इंसाफ नहीं मिला तो हम स्वयं सड़क पर उतरेंगे।

अखिलेश ने सीएम से मुलाकात को उचित कदम बताया
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कमलेश तिवारी के परिजनों से सीएम की मुलाकात को उचित कदम तो बताया है, साथ ही यह भी कहा है कि ऐसे ही हालात के शिकार अन्य लोगों से मिलने की उम्मीद भी जताई है। अखिलेश यादव ने रविवार को ट्वीट कर कहा कि प्रदेश की राजधानी में सरेआम हुई बेख़ौफ़ हत्या के शिकार मृतक के शोक-संतप्त परिवार से मिलना यथोचित क़दम है। आशा है मुख्यमंत्री  ऐसी ही सहृदयता इलाहाबाद, कन्नौज, झाँसी व मेरठ में भी प्रकट करने जाएँगे, जहाँ प्रदेश की बदहाल क़ानून-व्यवस्था के शिकार अन्य लोगों के परिजन रहते हैं। 



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