13 अगस्त 1996 को समाजवादी पार्टी के विधायक जवाहर पंडित की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी. शहर के सिविल लाइंस में पैलेस सिनेमा और काफी हाउस के बीच एके-47 राइफल से हत्या की गई थी.

 

प्रयागराज के जवाहर यादव हत्याकांड में एडीजे कोर्ट ने सजा सुना दी है. कोर्ट ने मामले में चारों दोषियों को आजीवन कारावास और डेढ़ लाख जुर्माने की सजा सुनाई.

हत्याकांड में बसपा के पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व विधायक उदयभान करवरिया, पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया और रामचंद्र त्रिपाठी को एडीजे बद्री विशाल पाण्डेय की कोर्ट ने सजा सुनाई है. इससे पहले 31 अक्टूबर को अदालत ने चारों हत्यारोपियों को दोषी करार दिया था.

बता दें कि 13 अगस्त 1996 को समाजवादी पार्टी के विधायक जवाहर पंडित की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी. शहर के सिविल लाइंस में पैलेस सिनेमा और काफी हाउस के बीच एके-47 राइफल से हत्या की गई थी.

हत्या के बाद मामला दर्ज हुआ और पुलिस जांच के साथ-साथ कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए थे. हत्या मामले के तहत करवरिया बंधुओं वारदात को अंजाम देने का आरोप लगा.

सभी पर कुल 7.20 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। विभिन्न धाराओं में सुनाई सजा एक साथ चलेगी। सभी अभियुक्त लगभग चार साल से जेल में बंद हैं। हत्याकांड 23 साल पहले हुआ था।

इससे पूर्व सुनवाई के लिए अभियुक्त करवरिया बंधुओं को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट परिसर में लाया गया है। कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। बचाव पक्ष ने कोर्ट से गुजारिश करते हुए कहा कि कम से कम सजा दी जाए। वहीं आभियोजन ने अधिक सजा देने की मांग की। इस दौरान शोरगुल होने लगा तो उदयभान ने हाथ जोड़कर शांति बनाए रखने की अपील की। कहा कि आप शुभचिंतक हैं या दुश्मनी निकलने आए हैं।

यह राजनैतिक सजा है, हाईकोर्ट में न्‍याय होगा : उदयभान करवरिया

कोर्ट में सजा सुनाए जाने के बाद बाहर निकलकर उदयभान करवरिया ने कहा कि हौसला न खोना, मुझे भूल न जाना। मैं लौटकर फिर आऊंगा शांति बनाए रखो। यह राजनैतिक सजा है, हाईकोर्ट से न्याय होगा।

इसके पूर्व जिला अदालत में कार्रवाई शुरू हुई थी।

 

फैसले को सभी को इंतजार, उमड़ी समर्थकों की भीड़

अब से कुछ घंटे बाद कोर्ट का फैसला आएगा। इसके मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। करवरिया बंधुओं कपिलमुनि, उदयभान एवं सूरजभान व उनके करीबी एक अन्य आरोपित रामचंद्र मिश्रा को नैनी जेल से लाने व ले जाने के साथ ही कचहरी परिसर में अतिरिक्त फोर्स तैनात है। कोर्ट में कार्यवाही की तैयारी शुरू है। एडीजे पंचम बद्री विशाल पांडे कुछ देर में आ सकते हैं कोर्ट। कोर्ट रूम में अधिवक्‍ता मौजूद हैं। करवरिया बंधुओं को कोर्ट लाने की तैयारी हो रही है। इसके लिए एंबुलेंस नैनी सेंट्रल जेल पहुंच गई है। 

 

 

कब हुई थी जवाहर पंडित की हत्‍या

13 अगस्त 1996 को सिविल लाइंस में हुई विधायक जवाहर पंडित की हत्या के मामले में एडीजे कोर्ट में सजा के बिंदु पर आज सुनवाई  होनी है। मुकदमा जवाहर के भाई सुलाकी यादव की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में लिखा गया था। इस हत्याकांड में एडीजे बद्री विशाल पांडेय की कोर्ट ने पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, उनके दोनों भाई पूर्व विधायक उदयभान व पूर्व एमएलसी सूरजभान सहित करीबी रामचंद्र मिश्रा उर्फ कल्लू को 31 अक्टूबर को दोष सिद्ध घोषित किया था। सुनवाई के बीच में ही राज्य सरकार ने करवरिया बंधुओं पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की संस्तुति भी की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। आज सजा के बिंदु पर सुनवाई शुरू होने वाली है। कचहरी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एसएसपी ने भी पहुंचकर जायजा लिया।

 

जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं और वादकारियों के अलावा सभी का प्रवेश बंद

जिला न्यायालय की नई बिल्डिंग में अधिवक्ताओं और वादकारियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सुरक्षा में तीन डिप्टी एसपी, 10 इंस्पेक्टर, 20 सब इंस्पेक्टर, एक कंपनी पीएसी के अलावा ट्रैफिक व सिविल पुलिस के सिपाहियों की तैनाती की गई है। अदालत के निर्णय को लेकर खुशी अथवा गम में किसी तरह की होने वाली प्रतिक्रिया पर भी पुलिस अधिकारियों की नजर रहेगी। अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कदम उठाएगी।

 

 

एसपी सिटी ने कहा, कोर्ट के निर्णय और आदेश का कराया जाएगा पालन

एसपी सिटी बृजेश श्रीवास्तव कहते हैं कि कचहरी में सुरक्षा-व्यवस्था के जरूरी इंतजाम किए गए हैं। कोर्ट के निर्णय और आदेश का पूरी तरह पालन कराया जाएगा। अराजकता फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

 

विधायक नीलम करवरिया ने किया फैसले को लेकर अधिवक्ताओं से विमर्श

पति और परिवार के अन्य सदस्यों को न्याय दिलाने के लिए अब विधायक नीलम करवरिया ऊपरी अदालत की शरण में जाने की तैयारी कर रही हैैं। रविवार को उन्होंने छठ पूजा के बाद अपने अधिवक्ताओं से मशविरा भी किया। 

उदयभान पर घोषित हुआ था पांच हजार इनाम

विधायक जवाहर पंडित हत्याकांड में लगभग 17 साल बाद वर्ष 2013 में आरोपित पूर्व विधायक उदयभान करवरिया पर पुलिस ने पांच हजार रुपये इनाम घोषित किया था। यही नहीं डुगडुगी पिटवाकर पुलिस ने मुनादी भी कराई थी। दरअसल, मामले में कपिलमुनि और सूरजभान के पास अरेस्ट स्टे था, जो बाद में निरस्त हो गया था। उदयभान को अरेस्ट स्टे नहीं मिला था।

 

पूर्व विधायक विजमा यादव बोलीं, दोषियों को मिले फांसी की सजा

जवाहर पंडित हत्याकांड के दोषियों को सोमवार को सजा सुनाई जाएगी। 23 साल बाद मामले में आरोपितों पर दोष सिद्ध होने के बाद सजा को लेकर कोर्ट के फैसले से पहले जवाहर पंडित की पत्नी पूर्व विधायक विजमा यादव ने राहत की सांस ली है। उन्होंने कहा कि दोषियों को फांसी की सजा मिले, तभी उनके पति की आत्मा को शांति मिलेगी।

 

बेटी की शादी की घर में हो रही तैयारी

अशोक नगर स्थित अपने आवास पर विजमा यादव इन दिनों अपनी बेटी की शादी के सिलसिले में व्यस्त हैं। इसी महीने बेटी की शादी है। वह बात करते-करते भावुक हो गईं। पुरानी बातें याद करते हुए बोलीं, जब पति की हत्या हुई तो बच्चे छोटे-छोटे थे। किसी तरह घर और परिवार को संभाला। राजनीति में भी सक्रिय रही। लंबे अंतराल के बाद अब हत्याकांड पर सुकून भरा फैसला आया है। कोर्ट में सच की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट क्या सजा सुनाएगी, वह तो नहीं पता लेकिन दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। कहा कि लोवर कोर्ट की सजा के बाद दोषी अगर हाईकोर्ट जाते हैं तो वह वहां भी उनके खिलाफ लड़ेंगी।

 

नहीं बदली जाएगी बैरक

बहुचर्चित विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित हत्याकांड के मामले में दोषी करार दिए गए करवरिया बंधु की बैरक सजा मिलने के बाद भी नहीं बदली जाएगी। उनके नाम नैनी जेल के सजायाफ्ता रजिस्टर में जरूर दर्ज किए जाएंगे। उन्हें जेल नियमों के तहत सजायाफ्ता कैदियों की तरह काम करना पड़ेगा। मामले में जिला अदालत में सजा के बिंदु पर सोमवार को सुनवाई होगी।

 

जेल नियमों के तहत सजायाफ्ता कैदियों की तरह ही काम करना पड़ेगा

हत्याकांड के आरोपित पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, उनके भाई पूर्व विधायक उदयभान, पूर्व एमएलसी सूरजभान व रामचंद्र मिश्रा उर्फ कल्लू सेंट्रल जेल नैनी के मालवीय सदन बैरक में बंद हैं। यह साधारण बैरक हंै। मामले में दोष सिद्ध होने के बाद करवरिया बंधु के दिनचर्या में अभी बहुत बदलाव नहीं आया है। वहीं सोमवार को सजा सुनाए जाने के बाद बहुत कुछ परिवर्तन देखने को मिल सकता है। उन्हें हत्या के जिस मामले में सजा सुनाई जानी है, वह घटना 13 अगस्त 1996 को हुई थी। इसमें तत्कालीन विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित समेत तीन लोगों की गोली मारकर हत्या हुई थी।

 जेल में मुलाकातियों की बढ़ गई थी भीड़

दोषी ठहराए जाने के बाद करवरिया बंधुओं से जेल में मिलने वालों की संख्या बढ़ गई। उनसे दर्जनों लोगों ने मुलाकात की और कुशल क्षेम पूछा जा रहा था। कहा जा रहा है कि इससे पहले तमाम लोग अपनी समस्या भी लेकर करवरिया बंधु के पास जेल में मिलने पहुंचते थे। वहीं अब स्थितियां बदल गई हैं। जेल पहुंचने वाले ज्यादातर समर्थक, करीबियों ने उनका हाल जानने के बाद सजा के एलान को लेकर चर्चा की। 

जेल में बंद कपिलमुनि की तबीयत बिगड़ी थी

जेल में बंद पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया की पिछले शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इस पर उन्हें स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान उनकी पत्नी कल्पना समेत अन्य लोग भी मौजूद थे। डॉक्टरों ने आंत और पेट में समस्या बताई थी, जिसका उपचार किया गया। वहीं जेल अधिकारियों ने इसे रूटीन चेकअप बताया।

बोले नैनी सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक

नैनी सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक एचबी सिंह ने कहा कि सजा मिलने के बाद कपिलमुनि समेत अन्य कैदियों की बैरक नहीं बदली जाएगी। सजायाफ्ता रजिस्टर में उनका नाम दर्ज कर जेल नियमों का पालन कराया जाएगा। शनिवार को रूटीन जांच के तहत कैदी को अस्पताल भेजा गया था।

किस धारा में कितनी सजा व जुर्माना

  1. धारा 302/149 भारतीय दंड संहिता : प्रत्येक अभियुक्त को आजीवन सश्रम कारावास व हर पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना। जुर्माने की राशि न देने पर दो-दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास।

  2. धारा 307/149 भारतीय दंड संहिता : प्रत्येक अभियुक्त को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास व प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न देने पर एक-एक साल का अतिरिक्त कारावास।

  3. धारा 147 भारतीय दंड संहिता : प्रत्येक को दो-दो वर्ष का कठोर कारावास व प्रत्येक पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न देने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास।

  4. धारा 148 भारतीय दंड संहिता : प्रत्येक को तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास व 20-20 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माने की राशि न देने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास।

  5. 7 आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम : छह-छह माह का कारावास।