उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसले में एक सदी से अधिक पुराने मामले का पटाक्षेप करते हुए अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया और साथ में व्यवस्था दी कि पवित्र नगरी में मस्जिद के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाए। न्यायालय ने कहा कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन अब केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगी, जो इसे सरकार द्वारा बनाए जाने वाले ट्रस्ट को सौंपेंगे।

पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट बनाया जाना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मत फैसला दिया और कहा कि हिन्दुओं का यह विश्वास निर्विवाद है कि संबंधित स्थल पर ही भगवान राम का जन्म हुआ था तथा वह प्रतीकात्मक रूप से भूमि के मालिक हैं।

तथ्य जो स्वीकार किए गए
1. मस्जिद को ढहाया जाना कानून का उल्लंघन
संविधान पीठ ने कहा कि 1949 में मस्जिद के केंद्रीय गुंबद के नीचे मूर्तियां रखा जाना एक गलत और अपवित्र काम था। छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को ढहाया जाना कानून का उल्लंघन था।

2. रामलला विराजमान को कानूनी व्यक्ति माना
अदालत रामलला को ही विवादित जमीन का मालिक माना है। ये रामलला ना तो कोई संस्था है और ना ही कोई ट्रस्ट, यहां बात स्वयं भगवान राम के बाल स्वरूप की हो रही है। यानी अदालत ने रामलला को कानूनी व्यक्ति माना है।

3. विवादित स्थान पर 16वीं सदी की मस्जिद थी
अयोध्या में विवादित स्थान पर 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद थी, जिसका निर्माण बाबर के सेनापति मीर बाकी ने किया था और जिसे कार सेवकों ने छह दिसंबर, 1992 को गिरा दिया था। 

4. तीन सदस्यीय मध्यस्थता टीम की तारीफ
संविधान पीठ ने विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले जस्टिस कलिफुल्ला, श्रीराम पंचू और श्रीश्री रविशंकर की प्रशंसा की। तीन सदस्यीय कमेटी ने विवाद का कोर्ट के बाहर हल निकालने की कोशिश की थी। 

तथ्य जो नकार दिए गए
1. मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने के सबूत नहीं
संविधान पीठ ने कहा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि मस्जिद के नीचे प्राचीन मंदिर था लेकिन एएसआई यह नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी।

2. मुस्लिम पक्षकारों की एएसआई रिपोर्ट पर आपत्ति खारिज
सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकारों ने एएसआई की रिपोर्ट खारिज कर दी थी। अदालत ने उनकी दलील को अतार्किक बताते हुए कहा कि एएसआई की रिपोर्ट विज्ञान पर आधारित है। उस पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।

मस्जिद पर बिना बाधा के कब्जे की दलील नहीं मानी
3. अदालत ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड यह साबित नहीं कर पाया कि विवादित जगह पर उसका बिना किसी बाधा के लंबे समय तक कब्जा रहा। बोर्ड ने दावा किया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ी जाती है और उसका लंबे समय से कब्जा है।

विवादित भूमि रिकॉर्ड में सरकारी जमीन
4. भूमि पर सदियों से कब्जे का मुस्लिम पक्ष का दावा खारिज। पीठ ने कहा, विवादित जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के तौर पर चिह्नित थी। यह सबूत मिले हैं कि राम चबूतरा और सीता रसोई पर हिंदू 1857 से पहले भी यहां पूजा करते थे। 

मंदिर के लिए बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज का गठन होगा
सर्वोच्च अदालत ने मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने में कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया है। केंद्र को सौंपी गई कार्य योजना 1993 में बने अधिग्रहण कानून की धारा छह और सात के अंतर्गत होगी। धारा छह में मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट गठित करने की बात है जिसके संचालन के लिए एक बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज होगा। मंदिर निर्माण की निगरानी केंद्र और राज्य सरकार की देखरेख में होगी।



हिंदी समाचार के लिए आप हमे फेसबुक पर भी ज्वाइन कर सकते है

►  अपने व्हाट्स एप पे खबर पाने के लिए लिंक पे क्लिक करे